कभी सोचा न था कि मंदी
का दौर इतना भारी
पडेगा कि प्रतिष्ठित
समझा जाने वाला सी.ए.
फार्म के सत्यापन के
बदले में पाँच-पाँच
सौ रूपये वसूल कर
खर्चा चलायेगा पर यह
घटना सत्य है। कानपुर
के एक चार्टर्ड
एकाउन्टेन्ट ने यह
कारनामा किया है। उसने
अपने अण्डर में काम
करने वाले सी.ए. छात्रों
के परीक्षा फार्म पर
हस्ताक्षर करने के
बदले में पाँच सौ
रूपये वसूलना शुरु कर
दिया। छात्रों ने इस
घटना की लिखित शिकायत
भारतीय चार्टर्ड
लेखाकार संस्थान (आईसीएआई)
कानपुर में देकर
संबन्धित सी.ए. के
खिलाफ कार्यवाई करने
की गुजारिष की है।
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क्रांति
हमेशा भूखे पेटों से
ज्वाला बन के निकलती है।
और अपने हक को हासिल करने
के लिए यदि वह कानून
व्यवस्था को हाथ में लेकर
खून बहाने से गुरेज न करे
तो आश्चर्य नहीं करना
चाहिए। विदेषी साम्यवादी
चिंतक ने यह बात बहुत सोच
विचार के बाद भले ही कही हो
लेकिन अब यह अर्धसत्य बन
के रह गया है। भारत में बढ़
रही नक्सली हिंसा विदेषी
खतरों से ज्यादा चिंता
जनक है। माओ के कथित
अनुयायिओं व नक्सलियों पर
नकेल की जरूरत बता रहे है -
शैलेन्द्र चिंतक
